खंडवा.नगर निगम द्वारा स्लाटर हाउस के पीछे बायाे मीथेन गैस प्लांट बनवाया जा रहा है। काम पूरा हाेने के बाद इमलीपुरा क्षेत्र में बरसाें से दुर्गंध और गंदगी की समस्या से लाेगाें काे निजात मिलेगी। आसपास के लगभग 44 घराें काे सस्ती रसाेई गैस भी मिलेगी। बायाेगैस प्लांट में पशुओं के गाेबर से लेकर वेस्ट मटेरियल व सीवर लाइन का पानी भी डाला जाएगा। पाइप लाइन से बायाेगैस घराें तक पहुंचाई जाएगी। 97 क्यूबिक मीटर क्षमता का यह प्लांट करीब 20 लाख रुपए खर्च कर बनाया जा रहा है। इसमें हर दिन औसत 20 पशुओं से निकलने वाला वेस्ट मटेरियल डाला जाएगा।
30 साल तक मिलेगी बायाेगैस
बायाे मीथेन गैस प्लांट जमीन में खुदाई कर बनाया जा रहा है। फिक्स डाेम टाइप टेक्नोलॉजी से इसका काम किया जा रहा है। खुदाई के बाद निर्माण कार्य शुरू हाे गया है। इसे बनाने के लिए विशेष रूप से लखनऊ के कारीगर भी आए हैं, ताकि निर्माण के बाद किसी तरह की समस्या नहीं आए। काम पूरा हाेने के बाद करीब 30 साल तक इस प्लांट से गैस मिल सकेगी।
फिर हाेने लगे अतिक्रमण
जिला प्रशासन और निगम द्वारा स्लाटर हाउस के पास से बड़ी मात्रा में गाेवंश जब्त करने के बाद सख्ती से अतिक्रमण हटाए गए थे। अब फिर से यहां प्रभावशाली लाेगाें द्वारा अतिक्रमण किए जा रहे हैं। जिस स्थान पर बायाे मीथेन गैस प्लांट बनाया जा रहा है, वहां भी नया अतिक्रमण किया जा रहा है। निगम अफसराें की चेतावनी के बावजूद संबंधित व्यक्ति द्वारा निर्माण कराया जा रहा है।
यह भी संभावना
- निगम चाहें ताे बायाे मीथेन गैस प्लांट से 38 गैस बत्ती के लैंप जला जा सकता है।
- 62.5 किलाेवाट का जनरेटर चलाकर बिजली बनाई जा सकती है। इसके लिए 80 प्रतिशत गैस और 20 प्रतिशत डीजल का इंतजाम करना पड़ेगा।
- कम्प्रेशर मशीन लगाकर 40 सिलेंडर गैस के यहां से भरे जा सकते हैं।
- बायाेगैस बनाने के बाद शेष बचे वेस्ट से जैविक खाद तैयार हाे सकेगी।
उप्र में कई स्थानाें पर बनाए इस तरह के प्लांट
खंडवा में बनाए जा रहे बायाे मीथेन गैस प्लांट की तरह उत्तर प्रदेश के शहराें में एेसे प्लांट बनाए गए हैं। इनसे घराें में पाइप लाइन से गैस सप्लाई की जा रही है। कुछ स्थानाें पर जनरेटर से बिजली भी बना रहे हैं।माेहम्मद इमरान, तकनीकी विशेषज्ञ
अधिक बारिश के कारण हुई निर्माण कार्य में देरी
संभवत: एक महीने में बायाे मीथेन गैस प्लांट बन जाएगा। काम शुरू हाे गया है। वर्क आर्डर जुलाई में ही दे दिया था, लेकिन अधिक बारिश हाेने से निर्माण में देरी हुई। वर्तमान में स्लाटर हाउस की सफाई में हर महीने करीब 50 हजार रुपए खर्च आता है। प्लांट बनने के बाद संभवत: 20 से 25 हजार रुपए का खर्च कम हाेगा।हिमांशु कुमार सिंह, आयुक्त, नगर निगम